MUKESH HISSARIYA,PATNA

Monday, April 4, 2016

FAN - Official Trailer | Shah Rukh Khan Motivated for "BLOOD DONATION''

Friday, September 18, 2015

( रक्तदान महादान )

Tuesday, October 8, 2013

स्कन्दमाता

जय माता दी , नवरात्र पर्व के पांचवें दिन आज स्कन्दमाता की पूजा-अर्चना की जा रही है।स्कन्द, भगवान कार्तिकेय का ही एक नाम है। इन्हीं की माता होने के कारण मां दुर्गा को स्कन्दमाता के नाम से भी जाना जाता है। सिंहासना गता नित्यं पद्माश्रि तकरद्वया | शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी || शेर पर सवार होकर माता दुर्गा अपने पांचवें स्वरुप स्कन्दमाता के रुप में भक्तजनों के कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहती हैं. कल्याणकारी शक्ति की अधिष्ठात्री देवी स्कन्दमाता (Skandmata) की नवरात्र में पूजा अर्चना करने का विशेष विधान है. देवी भगवती का यह स्वरूप देवताओं की सेना के मुखिया स्कन्द कुमार (कार्तिकेय) की माता का स्वरूप है, इसलिए उन्हें स्कन्दमाता कहा जाता है. स्कन्दमाता (Skandmata) शेर की सवारी पर विराजमान हैं और उनकी चार भुजाएं हैं. इन चतुर्भुजी और त्रिनेत्री माता ने अपने दो हाथों में कमलदल लिए हैं और एक हाथ से अपनी गोद में ब्रह्मस्वरूप स्कन्द कुमार को थामा हुआ है. चौथा हाथ आशीर्वाद की मुद्रा में है. इनका वर्ण पूर्णतः श्वेत है और ये कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं, जिस कारण माता को पद्मासना देवी भी कहा जाता है. शास्त्रों के अनुसारा माता स्कन्दमाता (Skandmata) की पूजा करने से सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है और उसे इस मृत्युलोक में परम शांति का अनुभव होने लगता है. माता की कृपा से उसके लिए मोक्ष के द्वार स्वमेव सुलभ हो जाता है. पौराणिक कथानुसार भगवती स्कन्दमाता ही पर्वतराज हिमालय की पुत्री पार्वती हैं. महादेव की पत्नी होने के कारण माहेश्वरी और अपने गौर वर्ण के कारण गौरी के नाम से भी माता का पूजन किया जाता है. माता को अपने पुत्र से अधिक स्नेह है, और इसी कारण इन्हें इनके पुत्र स्कन्द के नाम से जोड़कर पुकारा जाता है.

Wednesday, October 2, 2013

क्रोध

एक 12-13 साल के लड़के को बहुत क्रोध आता था। उसके पिता ने उसे ढेर सारी कीलें दीं और कहा कि जब भी उसे क्रोध आए वो घर के सामने लगे पेड़ में वह कीलें ठोंक दे। पहले दिन लड़के ने पेड़ में 30 कीलें ठोंकी। अगले कुछ हफ्तों में उसे अपने क्रोध पर धीरे-धीरे नियंत्रण करना आ गया। अब वह पेड़ में प्रतिदिन इक्का-दुक्का कीलें ही ठोंकता था। उसे यह समझ में आ गया था कि पेड़ में कीलें ठोंकने के बजाय क्रोध पर नियंत्रण करना आसान था। एक दिन ऐसा भी आया जब उसने पेड़ में एक भी कील नहीं ठोंकी। जब उसने अपने पिता को यह बताया तो पिता ने उससे कहा कि वह सारी कीलों को पेड़ से निकाल दे।लड़के ने बड़ी मेहनत करके जैसे-तैसे पेड़ से सारी कीलें खींचकर निकाल दीं। जब उसने अपने पिता को काम पूरा हो जाने के बारे में बताया तो पिता बेटे का हाथ थामकर उसे पेड़ के पास लेकर गया। पिता ने पेड़ को देखते हुए बेटे से कहा – “तुमने बहुत अच्छा काम किया, मेरे बेटे, लेकिन पेड़ के तने पर बने सैकडों कीलों के इन निशानों को देखो। अब यह पेड़ इतना खूबसूरत नहीं रहा। हर बार जब तुम क्रोध किया करते थे तब इसी तरह के निशान दूसरों के मन पर बन जाते थे। अगर तुम किसी के पेट में छुरा घोंपकर बाद में हजारों बार माफी मांग भी लो तब भी घाव का निशान वहां हमेशा बना रहेगा। अपने मन-वचन-कर्म से कभी भी ऐसा कृत्य न करो जिसके लिए तुम्हें सदैव पछताना पड़े...!!

डेंगू का उपचार

जय माता दी , डेंगू का उपचार: आजकल डेंगू एक बड़ी समस्या के तौर पर उभरा है, पुरे भारत में ये बड़ी तेजी से बढ़ता ही जा रहा है जिससे कई लोगों की जान जा रही है l यह एक ऐसा वायरल रोग है जिसका माडर्न मेडिकल चिकित्सा पद्धति में कोई इलाज नहीं है परन्तु आयुर्वेद में इसका इलाज है और वो इतना सरल और सस्ता है कि उसे कोई भी कर सकता है l तीव्र ज्वर, सर में तेज़ दर्द, आँखों के पीछे दर्द होना, उल्टियाँ लगना, त्वचा का सुखना तथा खून के प्लेटलेट की मात्रा का तेज़ी से कम होना डेंगू के कुछ लक्षण हैं जिनका यदि समय रहते इलाज न किया जाए तो रोगी की मृत्यु भी सकती है l यदि आपके आस-पास किसी को यह रोग हुआ हो और खून में प्लेटलेट की संख्या कम होती जा रही हो तो चित्र में दिखाई गयी चार चीज़ें रोगी को दें : १) अनार जूस २) गेहूं घास रस ३) पपीते के पत्तों का रस ४) गिलोय/अमृता/अमरबेल सत्व अनार जूस तथा गेहूं घास रस नया खून बनाने तथा रोगी की रोग से लड़ने की शक्ति प्रदान करने के लिए है, अनार जूस आसानी से उपलब्ध है यदि गेहूं घास रस ना मिले तो रोगी को सेब का रस भी दिया जा सकता है l - पपीते के पत्तों का रस सबसे महत्वपूर्ण है, पपीते का पेड़ आसानी से मिल जाता है उसकी ताज़ी पत्तियों का रस निकाल कर मरीज़ को दिन में २ से ३ बार दें , एक दिन की खुराक के बाद ही प्लेटलेट की संख्या बढ़ने लगेगी l - गिलोय की बेल का सत्व मरीज़ को दिन में २-३ बार दें, इससे खून में प्लेटलेट की संख्या बढती है, रोग से लड़ने की शक्ति बढती है तथा कई रोगों का नाश होता है l यदि गिलोय की बेल आपको ना मिले तो किसी भी नजदीकी पतंजली चिकित्सालय में जाकर "गिलोय घनवटी" ले आयें जिसकी एक एक गोली रोगी को दिन में 3 बार दें l यदि बुखार १ दिन से ज्यादा रहे तो खून की जांच अवश्य करवा लें l यदि रोगी बार बार उलटी करे तो सेब के रस में थोडा नीम्बू मिला कर रोगी को दें, उल्टियाँ बंद हो जाएंगी l ये रोगी को अंग्रेजी दवाइयां दी जा रही है तब भी यह चीज़ें रोगी को बिना किसी डर के दी जा सकती हैं l डेंगू जितना जल्दी पकड़ में आये उतना जल्दी उपचार आसान हो जाता है और रोग जल्दी ख़त्म होता है

Tuesday, October 1, 2013

SURPRISED

Your shoes 👞 can tell you your age.....try this and see ? 1. Take your shoe size. ? 2. Multiply it by 5. ? 3. Add 50. ? 4. Multiply by 20 ... ? 5. Add 1013. ? 6. Subtract the year you were born? ? The first digit is your shoe size, while the last 2 digits are your age. ? SURPRISED?.....even I was...

Saturday, September 21, 2013

"एक पत्र मुख्यमंत्री जी के नाम "

हम विगत कई साल से रोज सुनते आयें हैं की बेटी ना होगी तो क्या होगा इस दुनियां का,बेटी प्रगति की अनमोल रचना है सच मे बेटी ही प्रगति है ! इनकी सुरक्षा हमरा कर्तव्य है। कहने,सुनने और लिखने में ये पंक्तियां काफी भावनात्मक और उपदेश देने वाली है।सच्चाई कुछ और है हमारे देश में हर साल लाखों बच्चियों को जन्म से पहले ही मार दिया जाता है. सर, कन्या भ्रूण हत्या पर आपने लिखा(शिक्षित युवती कन्या भ्रूण हत्या नहीं होने देगी)इस पर हमारी सरकार काफी कुछ कर रही है।आपको जानकर आस्चर्य होगा डॉ नवजोत कौर सिन्धु (स्वस्थ्य विभाग ,पंजाब सरकार )का एक पत्र सभी प्रदेशों के साथ हमारे बिहार सरकार को भी प्राप्त हुआ जिसमे कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए लिक से हटकर एक उपाय बताया गया है इसमें डॉ नवजोत कौर सिन्धु ने कहा है की कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए सबसे पहले हमे भूंजे और पानमसाले की तरह बिक रही pill के नाम जुडी हर दवाई को हर दुकान में बिकने से रोकना होगा।सर,हम अपने आप पर गर्व कर सकते है की हमारी सरकार ने आसानी से मिलने वाली इस दवा को गैरकानूनी रूप से बिकने पर तुरंत प्रभाव से रोकने हेतु एक पत्र सभी ड्रग इंस्पेक्टर को दिया।हमारे ड्रग इंस्पेक्टरों ने काफी प्रयास भी किया लेकिन नतीजा सिफर है। सर,हमलोग अगर वाकई इस विषय पर गंभीर है तो सबसे पहले इस विषय को दिर्धता से केंद्र सरकार के सामने उठाना होगा की आसानी से मिलने वाली इन द्वावाओं की बिक्री पर रोक लगाये जब तक केंद्र सरकार इस तरह की दवा को प्रतिबंधित नही करेगी हम इस समस्या से निजात नहीं पा सकेंगे। दूसरा उपाय इन द्वावाओं के विज्ञापन को रोकने के लिए केंद्र सरकार से आग्रह करना होगा तीसरा सबसे अहम् उपाय जो की आपके सहयोग से हमलोगों को अपने घर से शुरू करना होगा वो है जनजागरण जिसके जरिए हम इस दवा के दुस्प्र्भओं से हर लोगों को आवगत करा सकतें हैं। तभी हम अपने आस-पास के लोगों की मानसिकता बदलने का सकारात्मक सोच सकते हैं।